प्रमाण

वो अच्छा लिखता है, वो बहुत अच्छा लिखती है सबसे अच्छा ?  नहीं। बिल्कुल नहीं। मैं ऐसी किसी भी धारणा को ख़ारिज करता हूँ। मुझे नहीं लगता “सबसे अच्छा लेखन” जैसी कोई चीज़ होती भी है। आप कला को जज करते हैं ,कैसे करते हैं इसके तीन सौ तरह तरीके हैं! कौन सबसे बेहतरीन हो […]

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Stagnant

Four walls,some books and a complete state of denial. That’s how a day passes by. That’s how past 10 days have been. Four walls,four white walls and to be found on them are shabby scribbles out of exasperation. Four walls which are concrete,encompassing an unhinged intellect. Some books,some highly unlikable books scattered around stamping authority […]

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के था के नहीं

ये जो था जो घड़ी दर घड़ी  इंतज़ार में बढ़ रहा था जो दिल में तरस और आंखों में प्यास सा पनप रहा था दिनचर्या में शामिल होके दिनचर्या सा बन रहा था प्यार था के नहीं था ? ये जो था किताबी आशिक़ी से परे फ़िल्मी देखाव से अन्य एक टूटी सी 5 इंच […]

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जब

जब दर-दर ढूंढे आशियाने को जब आग लगे मैख़ाने को, जब मय ही पानी-पानी हो जब मारी सूख जवानी हो, तब हौले से आवाज़ दियो बस हौले से आवाज़ दियो। जब बिन तौले आंसू टपके जब बिन बोले आँखे झपके, जब रास ना आये सूरज भी जब रात न बांधे धीरज भी, तब हौले तू […]

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अनन्त

सुबह मैं उठता तो हूँ, पर अकेला नहीं, मैं गिरकर उठने के प्रयास में फ़िर गिर जाता हूँ, मुझे गिराया जाता है, घसीटा जाता है, उठाया भी जाता है। ये शीशे भी सच नहीं बोलते, मैं दिखता तो हूँ, पर अकेला ही, शरीर पर कुछ निशान हैं, उभरे से ये निशान चीख रहे हैं, मुझे […]

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To the lot of you.

Hey there! Yes,you. The kind of you,there. It will pass. Its okay. It always was. I know its not just a regular night where you had a way to pass through the dilemmas. Its one of those nights where you play this effing game called “What’s my worth,after all?” You have been resilient enough to […]

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ये दिल्ली..

निकलता हूं सड़क पे जब दिल्ली की, कोसता हूं, कि गर्मियां दिल्ली में इतनी गर्म क्यों हैं? पानी प्रदूषित और हवा में ज़हर के साथ उदासी क्यों है? बस्ते टांगे लोग स्टैंड पर खड़े, भागम-भाग कर रहे हैं, खींच-तान,गाली-गलौज और  पसीने के साथ अपनी अदब भी बहा रहे हैं, ये दिल्ली में इतना गुस्सा क्यों […]

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A thing of normality..

​ Yeah,tell me more about poetry. How your heart aches more than mine, How you incorporate quiescence and Rage of ocean, And how me,was an  amateur , when I saw the very love in miniscule observations. How your nocturnal anxiety, crippling over conundrums was more of love, And me craving for your simple text, In the […]

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एक कविता रूठी है..

बिखरी वित्ति या कंजरे ख्याल में, पास कहीं जनता की चाह से दूर, और दूर कहीं पास दिल में, किताबों के ज़ख़ीरे को कोसती, रद्दी में सिमटी, चंदन के बाज़ार में, बबूल सी लाचार, चम-चमाते मसनद के रुतबे से ख़फ़ा बेडरूम में मैले पिचके तकिये सी, खान मार्केट के ऑरा से दूर, मंगल बाजार के […]

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